Wednesday, June 10, 2009

samay


यह कैंसा समय




लाड़ला गौद का नदीया कब हो गया इतना बड़ा की चरनोई-शमशान खेलने लगा चोपाल में चोसर और बैठ्कान
दावं लगाता खेत -खलीहान ,माँ कलिपती हो जुत गई सरपंच की पलाऊ से गई बूदी यह कैसा समय है ? खेतउक्टे की दरारों सी उभरी चेहरे पर लकीरें badari के बाल हो गए धवल कपासी हल्लू का कुआँ मुल्लू का खेत समाये पटेल की टगर में ,

1 comment: